Vikas Purohit "Poorve"

A New Age Writer and Poet

तन्हाई

पहले तुम थी अब ये तन्हाई है मगर तन्हाई भी तो तुम्हे ही लाई है बन गई है मेरी साँसों की तरह कुछ रहे न रहे ये रहेगी आखिरी दम तक बेशक ज़माने ने छीन लिया है तुम्हे मुझसे मगर

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इंतज़ार

मैं कब से वो नज़र तलाश करता हूँ ना जाने कब से तेरा इंतज़ार करता हूँ। दिल में आये तो दरिया हो जाए कब से वो बाकियों को दरकिनार करता हूँ। तेरा चेहरा चाहे जुदा हो सबसे जहां में मगर

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खून हर किसी का अब उबाल में है

कौन नहीं जानता कि वो किस हाल में हैं गीदड़ छुपे हुए शेर की खाल में हैं बहुत उड़ रहे थे परिंदे बन के ख़्वाबों में नींद से जागे तो जाना पड़े नाल में हैं चाहे लाख झुठलाने की कोशिश

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चुनाव आते ही

मुझे पता है तुम वही करोगे फिर से चुनावआते ही वही वादेफिर से, वहीघोषणाएं फिर से मगरनहीं समझोगे कि दिलतोड़कर जोड़ने से रहजाती है दरारें झांकते हैं जिनमे से जख्म, दर्द, हर वक्त तन पर कपड़ा डालने से नहींलौट आती लुटी

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मेरे रेल का सफ़र

बाहर शोर शराबा, भीतर एक सन्नाटा जैसेदर्शक बन कर सफ़र ये मैंने काटा सबकुछ जैसे आतुर, दिल मेंबस जाने को कोशिश कर रहे हैं मुझमे मिल जाने को अजनबी सारे चेहरे, नकाब रखे हैं पहने चेहरों से ज्यादा सबके चमक रहे हैं गहने

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हर पल मैं ही

दिल परेशां सा फिर हुआ है आज  कहीं तुमने कुछ कहा तो नहीं दिल में  एक आवाज़ आई है कानों में मेरे  कहीं तुमको कुछ कहा तो नहीं किसी ने  लब खामोश हैं मगर दिल धड़क रहा है  जैसे लहरें

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कोई ऐसा काम करूँ मैं, एक मरुँ एक लाख बनूँ मैं

रक्त मेरा आज क्यूँ लगने लगा है खौलने  हर दिन, घडी, हर पल लगा है जिंदगी को तौलने  रास्ते हज़ार है तो लाख है रूकावटे  रुकना नहीं है, दिल से मेरे आ रही है आहटें  आहटों में मुझको मेरा अक्स

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मैं समय का बहता दरिया हूँ

ना गुजरी बाते कहता हूँ, ना बीते सपने बुनता हूँ… मैं समय का बहता दरिया हूँ, बस आज के पल में रहता हूँ… कहना सुनना सब हो ही चुका, बाकी न कुछ भी रखता हूँ.. खुली हुई किताब हूँ मैं,

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चाहूँ अब मैं कुछ भी नहीं

सब कुछ है तो सही मगर लगता जैसे कुछ भी नहीं  क्या तुम ही हो मेरी सब कुछ, क्या तुम बिन मैं नहीं  यादों में तो हो, मेरी बातों में भी हो  मेरी जीने की वजह क्या तुम बिन कुछ नहीं 

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मैं माफ़ी के काबिल ना हूँ, करना ना तुम माफ़ मुझे

जान तेरी जो ले ली बहना, मेरे वंश के लोगों ने  मैं माफ़ी के काबिल ना हूँ, करना ना तू माफ़ मुझे  बेशक उनमे शामिल ना हूँ, पर मैं भी अपराधी हूँ  रोक नहीं पाया ये सब कुछ, कहीं तो

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