Vikas Purohit "Poorve"

A New Age Writer and Poet

धर्म की खातिर

किसी की जान लेकर बेफिक्री से कैसे जीते हैं ये कौन लोग हैं जो इंसानियत का लहू पीते हैं माफ़ी मांग लेने से नहीं जाते दर्द लौट कर कभी ये बात वही समझेंगे जिन पर वो पल कभी बीते हैं जायज़ ठहराते हैं अपनी बात

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स्वतंत्रता सेनानी

आज ऑफिस में एक शख्स आये, उम्र 115 वर्ष होने में 3 महीने कम, मगर बोलने की और काम करने की ऊर्जा देख कर कोई युवा भी शरमा जाए। उनके बारे में थोडा जाना तो आश्चर्य का ठिकाना ना रहा,

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धर्म का अपमान

हालाँकि धर्म और राजनीती पर ना तो कोई बहस की जा सकती है और ना ही कभी एकमत हुआ जा सकता है मगर फिर भी अपनी बात आपके बीच रखना चाहूँगा, आप इसे ठुकरा देने के लिए पूर्णतः स्वतंत्र हैं।

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तिरंगे के तीन रंगों का मतलब

बहुत हुआ बच्चों को बहकाना, झूठे अर्थ समझाना। बचपन से सुनता आ रहा हूँ तिरंगे के तीन रंगों का मतलब:- केसरिया त्याग और बलिदान का प्रतीक, सफ़ेद शांति का प्रतीक और हरा धरती की हरियाली का प्रतीक। मगर आज जाकर

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क्यों तलाशते हो तुम

क्यों तलाशते हो तुम मुझे मेरी हर कविता में  कि जैसे लिखी हो मैंने सब अपने ही अनुभवों से  कभी किसी कविता में बेवफा खुद को पाती हो  और दर्द भरे दिल को मुझसे जोड़ बैठती हो  कभी मेरी यादों

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हिंदी दिवस

आज हिंदीदिवस है, 14 सितम्बर1949 को हिंदी को राजकाजकी भाषा घोषितकिया गया औरहम पागलों कीतरह उसे राष्ट्रीयभाषा मान बैठेऔर उसे अपनेस्वाभिमान से जोड़बैठे, ये तोभला हो उसइंसान का जिसनेकुछ दिन पहलेएक आरटीआई केमाध्यम से येजवाब पाया किहिंदी राजकाज कीभाषा है,

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भक्त का मतलब

कई दिनों से एक शब्द बड़ा चलन में आ रहा है राजनीती में “अंधभक्त”, अब जो ये शब्द इस्तेमाल करते हैं उन्हें कौन समझाए कि भक्त तो अंधे ही होते हैं, अगर भक्त सवाल करने लग जायेगा तो वो भक्त

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कूल या नामाकूल

कुछ चीजें इतनी तकलीफ देती है मगर उन्हें वक्त के फैसले पर छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहता। जब हमारे 5 जवानों की और हमारी बहन संतोष की हत्या हुई तो उसी शाम हमने उनको श्रद्धांजलि देने के लिए

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तरक्की

जब भी अपने दफ्तर जाता हूँ तो अक्सर कुछ न कुछ ऐसा नजर आ जाता है जिस पर शायद दुनिया की निगाह या तो पड़ती नहीं या फिर कोई गौर करना नहीं चाहता। खैर इन आँखों में ना जाने क्यूँ

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कोई कैसे यकीं कर ले

अपनी ऐशगाह में बैठ कर तुम यूँ बरगलाते हो खुद की रौशनी के लिए औरों का दिल जलाते हो बहुत मुद्दत से तुमने गरीबों की भूख नहीं देखी तुम तो सदा अक्ल के अंधों को ही चराते हो कोई कैसे यकीं कर ले अब

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कब तक शर्म करते रहेंगे अपने भारतीय होने पर?

कब तक शर्म करते रहेंगे अपने भारतीय होने पर?————————————————————————७५२ ई० तक इंग्लैण्ड में मार्च ही पहला महीना हुआ करता था और उसी गणित से ७वाँ महीना सितम्बर और दसवाँ महीना दिसम्बर था लेकिन १७५२ के बाद जब शुरुआती महीना जनवरी

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शिक्षा व्यवस्था

*Indian Education Act -* 1858 में Indian Education Act बनाया गया इसकी ड्राफ्टिंग लोर्ड मैकोले ने की थी लेकिन उसके पहले उसने यहाँ (भारत) के शिक्षा व्यवस्था का सर्वेक्षण कराया था, उसके पहले भी कई अंग्रेजों ने भारत के शिक्षा व्यवस्था के

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