Vikas Purohit "Poorve"

A New Age Writer and Poet

About

ये बाजार की रौनक है या बढ़ता हुआ कम्पीटीशन जिसने आज खुद को मुँह मियां मिट्ठू बनने को विवश किया है, वैसे तो “तारीफ वही जो गैर करे” मगर जब दौलत के दम पर “लहर” तक बनाई जा सकती है, “पर्सनैलिटी” के दम पर हर कविता बाजार में चलाई जा सकती है तो क्या हुआ जो मैं भी थोड़ी सी कोशिश कर लूँ किसी और के चश्मे से खुद को देख कर अपने बारे में ही लिखने की, वैसे भी किसी ने कहा है कि आज के दौर में जिंदगी ‘फेसबुक’ की तरह हो गई है जिसमे हर कोई सिर्फ कहता है सुनने वाला कोई नहीं। 

उपलब्धियों के नाम पर भारत में जन्म लेना, स्कूल में भाषणबाज़ी के कारण मिले कुछ एक ईनाम, 11वीं कक्षा में टॉप करने के कारण मिला “वाणिज्य शिखर” पुरस्कार और अपनी कविताओं से कुछ एक लोगों को प्रभावित करने के अलावा बस एक खुद की कविताओं की किताब छपवाना रहा है।

लिखना उसी उम्र में शुरू किया जिस उम्र में हर इंसान को लगता है कि उसे भी प्यार हो सकता है मतलब 11वीं में ही पहली कविता लिखी थी प्रकृति और जिंदगी पर, हालाँकि आज वो कविता बिलकुल बचकानी लगती है मगर उसी ने इतना हौसला दिया या यूँ कहूँ इच्छा दी कि खुद के दिल में जो भी हो वो लिख कर दिल हल्का कर लिया जाये। साहित्यिक दृष्टि से शायद मेरी कविताओं, बातों का कोई मोल नहीं मगर लिखता हूँ तो बस खुद को व्यक्त करने के लिए और वो भी ऐसे शब्दों से कि जिसको भी हिंदी आती है उस हर इंसान को समझ आ सके ।  

जिंदगी में अगर सबसे ज्यादा मेहनत की है तो वो की है CA की डिग्री पाने में, उसके अलावा तो सब भगवान भरोसे ही हुआ है। और मजे की बात ये है कि CA बन कर ये अहसास हुआ कि असल में तो लिखना ही है बस।

एक सवाल जो कई दोस्त पूछते हैं कि इस “पूरवे” का क्या अर्थ है, सच कहूँ तो अर्थ मुझे भी नहीं पता बस परदादी जी बचपन में मुझे इसी नाम से बुलाती थी और उनकी बातों से जो मतलब निकलता था इस शब्द का वही अर्थ मैं सबको बता देता हूँ, “पूरवे” मतलब वो जो पूरा करे इंग्लिश में कहूँ तो  Poorve is the one who completes anything/anyone.

खुद का लिखा तो सबको अच्छा लगता है, असली मजा तो तब है जब आपको अच्छा लगे, अगर जिंदगी की भागदौड़ में कहीं एक पल मिले और लगे कि वेस्ट कर रहे हो तो थोड़ा सा वक्त निकाल कर पढ़ना मेरे शब्दों को भी, हो सकता है आपको पसंद आये।

अब ये मत समझना कि मैं खुद को ही कोस रहा हूँ, दरअसल खुद को कम आंक नहीं रहा बस कम कह रहा हूँ ताकि आपके लिए करने के लिए कुछ काम कम हो जाये।

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