Vikas Purohit "Poorve"

A New Age Writer and Poet

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मानव कैसे कहूँ तुझे

पशु कहूँ, हैवां कहूँ या कोई लाऊं लाऊं शब्द नवीन 
मानव कैसे कहूँ तुझे, जब मानवता रही नहीं 
क्रूर कहूँ, जालिम कहूं, दुष्कर्मी, हृदयहीन 
खून तेरा पानी हुआ, जो तू पिघला ही नहीं 
एक पल भी ना सोचा तूने, तू भी बेटा है, भाई है 
जो तूने हैवां होने की अब सारी  हदें गिराई हैं 
सोचा ना तूने इस तन में, एक दिल भी हर दम रहता है 
उम्मीदें रखने वाला तुझसे, एक पिता तेरे घर बसता है 
हर ख्वाहिश, दुआ जो तुझे मिली, उन सबकी साख गवाई है 
हम मानव हैं, कोई चीज़ नहीं, तूने ये बात भुलाई है 
बेशर्म कहूँ, पापी कहूँ, तू दया हया विहीन
मानव कैसे कहूँ तुझे,जब मानवता रही नहीं 
जबसे तेरी ये रूह बिकी, हर कदम पे तू शैतान हुआ 
तेरे जैसों के कारण ही, हर पुरुष यहाँ बदनाम हुआ 
कैसे दिलवा पाउँगा मैं, अब यकीं यहाँ हर लड़की को 
कल सबने देखा है उसको, उस बहन का जो अंजाम हुआ 
हर शख्स यहाँ मुजरिम लगता, ये तेरी ही तो कमाई है 
इंसानियत शर्मसार करने की कसम तूने खाई है 
जल्लाद है तू, दुष्ट कहूँ, दानव खर, कुलहीन 

मानव कैसे कहूँ तुझे, जब मानवता रही नहीं 

FDI

बंद करो ये रोना धोना FDI के मुद्दे पर
बने एकमत सुर जो हमारा FDI के मुद्दे पर,
किसने कहा कि खतरा है वो भारत माँ के बेटों पर
क्यूँ इतना विश्वास हो चला है हमको अंग्रेजों पर
किसने कहा कि खतरा है वो तन पर पहनी खादी पर
जब तक जिंदा है ना आये, आंच मेरी आज़ादी पर 
फूट डाल कर राज किया था, अब फिर वही चलाओगे
नेताओं को चाहे कर लो, हम में डाल ना पाओगे 
वे चाहे खुद का ही सोचें, हम जो अब तक जिन्दा हैं 
देश में चाहे तुम आ जाओ, दूकान चला ना पाओगे
कभी जेब में पैसे ना हो, तू ना देगा खाद मुझे 
कभी जरुरत होगी मुझको, देगा ना तू उधार मुझे
मरने में, परने में, सबके, हो पायेगा शामिल ना
कभी मुसीबत आई मुझ पे, देगा ना तू हाथ मुझे
दूकान खोल लेने से केवल, देश नहीं लुट पायेगा 
अगर नहीं चाहेंगे हम जो, वो क्या कुछ कर पायेगा 
है दलील देते कृषकों की, उनकी सेहत की बात करें 
देखभाल जो करें किसान की,  वो क्यूँ उन तक जायेगा 
हम सब ये संकल्प हैं लेते, ना आयेंगे द्वार तेरे
चाहे हम रह लेंगे खाली, लेंगे ना अहसान तेरे 
हमको चिंता होती है नुक्कड़ वाले चाचा के बच्चों की
मर जायेंगे महंगा खा कर, पर आयेंगे ना काम तेरे