Vikas Purohit "Poorve"

A New Age Writer and Poet

कूल या नामाकूल

कुछ चीजें इतनी तकलीफ देती है मगर उन्हें वक्त के फैसले पर छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहता। जब हमारे 5 जवानों की और हमारी बहन संतोष की हत्या हुई तो उसी शाम हमने उनको श्रद्धांजलि देने के लिए एक प्रार्थना सभा रखी थी। यहाँ की वस्त्रापुर लेक के मुख्य द्वार पर हम पंद्रह से बीस लोग शामिल हुए, मोमबत्तीयां और हाथ में उनके सम्मान में लिखे पोस्टर के साथ हम सड़क किनारे बैठे। पहले पांच मिनट का मौन रखने के बाद हमने “रघुपति राघव राजा राम” भजन गाना शुरू किया। काफी लोग हमें हैरत भरी नज़रों से देखते हुए जा रहे थे। उनमे से कुछ रुक कर हमें सुन भी रहे थे। हमारे पास में खड़ी एक मक्की का ठेला लगाने वाली बहन लगातार हमारे साथ वो भजन गाये जा रही थी मगर जो सबसे अधिक तकलीफ देने वाली बात लगी वो ये कि उस जगह से कुछ ही दूरी पर एक बड़ा सा मॉल है जहाँ से निरंतर खुद को मॉडर्न, स्टाइलिश, कूल कहने वाले युवक युवतियां निकल रहे थे, कुछ साथ साथ तो कुछ अकेले, और हमें इस तरह सड़क किनारे बैठा देख कर और भारत माँ की जयकार करते देख कर पता नहीं क्यूँ उनके चेहरे पर हसीं आ रही थी। कुछ एक लड़कियों ने तो हमारे साथ जयकारे भी लगाये मगर उसके तुरंत बाद इतनी जोर से हँसी कि जैसे हमारे साथ साथ उन शहीदों से भी उन्हें कोई वास्ता नहीं जिन्होंने हमारे खातिर अपनी जान दे दी। देशभक्ति, भारत माँ, वन्दे मातरम और ये सब बाते उनके लिए कूल नहीं है ना, क्या करें साहब हम ना तो भारतीय संस्कृति की दुहाई देते हैं और ना ही उनका विरोध करते हैं अपनी अपनी पसंद है, अभी साथ में भारत माँ की जय कर लो तो अच्छा है वरना यूँ ना हो कि किसी दिन किसी अंग्रेज का संडास साफ़ करते करते पूरी जिंदगी गुलामी में गुजरे। तब दिखाना अपनी कूलनेस, तब हँसना अपनी हालत पर। पर ख़ैर निश्चिंत रहिये हमारे जिन्दा रहते वो नौबत नहीं आएगी आप पर। आप मजे कर सकते हो अभी भी। जय हिन्द। वन्दे मातरम।

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